वाराणसी। बसंत पंचमी के पावन अवसर पर संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के वाग्देवी मन्दिर परिसर एवं शिक्षा शास्त्र विभाग में वैदिक मंत्रोच्चार, दीप प्रज्वलन एवं विधिवत पूजन के साथ भव्य आयोजन सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने मां सरस्वती की आराधना को ज्ञान, विद्या और कलाओं में प्रगति का स्रोत बताते हुए कहा कि यह पर्व सत्य, न्याय और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है तथा ऋतु परिवर्तन का भी संदेश देता है।
पूर्वाह्न 11 बजे सम्पन्न पूजन-अनुष्ठान में कुलपति प्रो. शर्मा ने कहा कि वैदिक परम्परा के अनुरूप आचार्यों एवं विद्यार्थियों के साथ यह आयोजन विश्वविद्यालय के सर्वविध विकास तथा राष्ट्र के अभ्युदय की कामना के साथ हर्षोल्लासपूर्वक मनाया गया। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती का प्राकट्य हुआ, इसलिए यह तिथि विद्यार्थियों, विद्वानों एवं कलाकारों के लिए विशेष फलदायी मानी गई है।
कुलपति ने कहा कि बसंत पंचमी के आगमन से प्रकृति में नवजीवन, उल्लास और सौंदर्य का संचार होता है। खेतों में सरसों और गेहूं की फसलें लहलहाने लगती हैं। हिंदू परम्परा में पीला रंग—चाहे वह हल्दी हो या सरसों—बसंत का प्रतीक है और यह रंग मां सरस्वती को भी अत्यंत प्रिय है।

कार्यक्रम के संयोजक एवं वेद विभागाध्यक्ष प्रो. महेन्द्र पांडेय ने बताया कि वाग्देवी मन्दिर परिसर भारतीय संस्कृति, संस्कार और भारतीयता की देवी मां भारती से अनुप्राणित है, जहाँ से देश ही नहीं, विदेशों तक भारतीय विद्या-परम्परा की पताका लहराती है।
पूजन के उपरांत संगीत विभाग द्वारा मां शारदा के श्लोकों के साथ वाद्ययंत्रों की मधुर प्रस्तुति दी गई। डॉ. श्रुति सारस्वत उपाध्याय एवं विद्यार्थियों ने भजन–कीर्तन प्रस्तुत कर पूरे मन्दिर परिसर को संगीतमय बना दिया। इस अवसर पर प्रो. रामपूजन पांडेय, प्रो. हेतराम कच्छवाह, प्रो. शैलेश कुमार मिश्र, प्रो. अमित कुमार शुक्ल, डॉ. विशाखा शुक्ला, परीक्षा नियंत्रक दिनेश कुमार सहित आचार्यगण एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।









