वाराणसी। देश की आज़ादी, संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति आस्था का महापर्व 77वां गणतंत्र दिवस छित्तूपुर स्थित आदर्श बालिका जूनियर हाईस्कूल के प्रांगण में गरिमा, गौरव और राष्ट्रभक्ति के साथ मनाया गया। इंडियन एसोसिएशन ऑफ जर्नलिस्ट (आईएजे) एवं रियल मीडिया फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस समारोह ने समाजसेवा, पत्रकारिता और जनकल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली विभूतियों को सम्मानित कर एक प्रेरणादायी संदेश दिया। समारोह का शुभारंभ रियल मीडिया फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. पंकज श्रीवास्तव, आईएजे के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. कैलाश सिंह ‘विकास’, मुख्य अतिथि प्रो. ओमप्रकाश शर्मा (वरिष्ठ रेडियोलॉजिस्ट) तथा विशिष्ट अतिथि डॉ. सुभाष चंद्र (संस्थापक अध्यक्ष, नादान परिंदे साहित्य मंच) द्वारा संयुक्त रूप से ध्वजारोहण से हुआ। राष्ट्रगान के साथ पूरा परिसर देशप्रेम से सराबोर हो उठा। मुख्य अतिथि प्रो. ओमप्रकाश शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि गणतंत्र दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि संविधान के प्रति निष्ठा, कर्तव्यबोध और सामाजिक उत्तरदायित्व की पुनःप्रतिज्ञा का दिवस है। वहीं विशिष्ट अतिथि डॉ. सुभाष चंद्र ने स्वामी विवेकानंद के विचारों को स्मरण कराते हुए युवाओं से राष्ट्रनिर्माण में सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया।
समारोह की अध्यक्षता डॉ. पंकज श्रीवास्तव ने की। संचालन डॉ. कैलाश सिंह ‘विकास’ एवं डॉ. विनय श्रीवास्तव ने किया। स्वागत विक्रम कुमार तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रकाश मोहम्मद दाऊद ने प्रस्तुत किया। इस अवसर पर समाज, पत्रकारिता और जनसेवा के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए गौरव रत्न सम्मान से डॉ. विनय कुमार श्रीवास्तव, डॉ. सुभाष चंद्र, समाजसेविका विजयता सचदेवा, डॉ. विवेक कुमार सिंह, प्रकाश कुमार श्रीवास्तव “गणेश जी” एवं वरिष्ठ पत्रकार डॉ. कैलाश सिंह ‘विकास’ को सम्मान पत्र, रुद्राक्ष माला, अंगवस्त्र और स्मृति चिन्ह प्रदान कर अलंकृत किया गया।
वहीं स्वामी विवेकानंद सम्मान से समाजसेविका विजयता सचदेवा, डॉ. कोमल सिंह, मंजू सिंह, मोहम्मद दाऊद, राजू वर्मा एवं विक्रम कुमार को प्रमाण पत्र एवं अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में सुनील शर्मा, विक्की वर्मा, राकेश विश्वकर्मा, राम जियावन प्रजापति, संकट्ठा प्रसाद, अरविंद कुमार, सुनीता देवी सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक, पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। समूचा समारोह राष्ट्रगौरव, सामाजिक चेतना और प्रेरणा का जीवंत उदाहरण बना—जहाँ सम्मान केवल अलंकरण नहीं, बल्कि समाज के प्रति समर्पण की पहचान के रूप में उभरा।









