वाराणसी। प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा की धरोहर और संस्कृत शिक्षा के प्रमुख केंद्र सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी का 69वाँ स्थापना दिवस महोत्सव शुक्रवार को अत्यंत गरिमामय, अनुशासित और आध्यात्मिक वातावरण में संपन्न हुआ। पूरे परिसर में वेदोच्चारित मंत्रों की गूंज और पारंपरिक अनुष्ठानों की पवित्रता ने कार्यक्रम को विशिष्ट गरिमा प्रदान की।
कार्यक्रम का शुभारंभ वेद विभाग में प्रातः वैदिक रीति-विधि से पूजन-अर्चन, शक्ति समाराधना, हवन एवं माँ सरस्वती की आराधना के साथ हुआ। विद्वानों द्वारा उच्चारित मंत्रों से परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से अनुप्राणित हो उठा।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, दर्शन और जीवन मूल्यों की आत्मा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान समय में आवश्यकता इस बात की है कि परंपरागत ज्ञान और आधुनिक शिक्षा के बीच संतुलन स्थापित किया जाए। उन्होंने विश्वविद्यालय परिवार—शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों—से भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

समारोह के दौरान विश्वविद्यालय के गौरवशाली इतिहास पर भी प्रकाश डाला गया। बताया गया कि इसकी जड़ें वर्ष 1791 में स्थापित संस्कृत कॉलेज, वाराणसी से जुड़ी हैं, जिसकी स्थापना ब्रिटिश अधिकारी जोनाथन डंकन द्वारा की गई थी। स्वतंत्रता के बाद वर्ष 1958 में इसे विश्वविद्यालय का स्वरूप दिया गया और महान शिक्षाविद् एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. सम्पूर्णानंद के नाम पर इसका नामकरण किया गया। आज यह संस्थान देश-विदेश में संस्कृत अध्ययन और शोध का प्रमुख केंद्र है।
स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित हवन में कुलपति सहित विश्वविद्यालय के आचार्यों, अधिकारियों और कर्मचारियों ने जनकल्याण, राष्ट्र अभ्युदय तथा संस्कृत भाषा के संरक्षण और वैश्विक प्रसार की मंगलकामना की। वैदिक परंपराओं के अनुरूप संपन्न इस अनुष्ठान ने कार्यक्रम को आध्यात्मिक ऊंचाई प्रदान की।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों, शोध कार्यों तथा संस्कृत के अंतरराष्ट्रीय विस्तार पर भी विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही विश्वविद्यालय को आधुनिक संसाधनों से सशक्त बनाते हुए वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में रणनीति पर विचार-विमर्श किया गया।
समारोह का संचालन वेद विभागाध्यक्ष प्रो. महेन्द्र पांडेय के निर्देशन में तथा संयोजक डॉ. विजय कुमार शर्मा के संयोजन में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस अवसर पर प्रो. शैलेश कुमार मिश्र, डॉ. रविशंकर पांडेय, डॉ. सत्येन्द्र कुमार यादव, संतोष कुमार दूबे, सुशील कुमार तिवारी सहित अनेक विद्वान, अधिकारी, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।









