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बड़ौदा के दो ख्यात चित्रकारों की प्रदर्शनी से सजी ‘आज़ाद कला दीर्घा’, काशी विद्यापीठ में कला–संस्कृति का राष्ट्रीय विस्तार, अखिल भारतीय मूर्तिकला शिविर भी पूरे शबाब पर

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वाराणसी। स्वतंत्रता संग्राम के अमर नायक चंद्रशेखर आज़ाद की कर्मभूमि महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के ललित कला विभाग में नवनिर्मित आज़ाद कला दीर्घा का शुक्रवार को भव्य उद्घाटन हुआ। उद्घाटन कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी, वरिष्ठ कलाकार एस. प्रणाम सिंह तथा प्रो. सत्येंद्र बाऊनी ने वैदिक दीप प्रज्वलन के साथ किया। यह अवसर विश्वविद्यालय के कला परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय उपलब्धि के रूप में सामने आया। उद्घाटन के साथ ही गुजरात के बड़ौदा से आमंत्रित दो प्रतिष्ठित महिला चित्रकारों—उर्मिला पड़िया और मीनाक्षी पटेल—की चित्रकला प्रदर्शनी ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। दीर्घा के दो खंडों में आयोजित प्रदर्शनी में उर्मिला पड़िया की ‘वासंती’ और मीनाक्षी पटेल की ‘फुलारी’ शीर्षक प्रदर्शनी प्रस्तुत की गई। दोनों कलाकारों की लगभग 60 कृतियाँ वसंत ऋतु की कोमलता, रंगों की ताजगी और पुष्प-जगत की सजीव संवेदनाओं को अभिव्यक्त करती हैं। उद्घाटन अवसर पर आज़ाद कला दीर्घा परिसर में चंद्रशेखर आज़ाद की प्रतिमा का अनावरण भी किया गया, जिसने कार्यक्रम को ऐतिहासिक और भावनात्मक गरिमा प्रदान की। कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने अपने संबोधन में कहा कि गुजरात की दो प्रतिष्ठित कलाकारों की प्रदर्शनी से दीर्घा का राष्ट्रीय स्तर पर प्रसार होगा और काशी विद्यापीठ समकालीन कला संवाद का सशक्त केंद्र बनेगा। इस अवसर पर दोनों कलाकारों के प्रदर्शनी कैटलॉग का भी विमोचन किया गया। प्रदर्शनी संयोजक अतुल पड़िया ने राज्य ललित कला अकादमी के अध्यक्ष एवं विभागाध्यक्ष डॉ. सुनील कुमार विश्वकर्मा को पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम में कुलानुशासक प्रो. के. के. सिंह, वित्त अधिकारी प्रतिनिधि श्री जयशंकर, संपत्ति अधिकारी एस. एन. सिंह, डॉ. शत्रुघ्न प्रसाद, एस. एंजेला, डॉ. रामराज, डॉ. शशिकांत नाग, डॉ. सुनील कुमार सिंह कुशवाहा, डॉ. आर. गणेशन, मोनिका वर्मा, पुरातन छात्र सौरभ सिंह, पद्मिनी मेहता सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी और कला प्रेमी उपस्थित रहे। इसी क्रम में विश्वविद्यालय परिसर में चल रहे अखिल भारतीय मूर्तिकला शिविर के तीसरे दिन मूर्तिकारों की कृतियाँ आकार लेने लगीं। शिविर के आयोजन में राज्य ललित कला अकादमी के सदस्य एवं स्थानीय मूर्तिकार डॉ. प्रफुल्ल राव भारती की भूमिका अहम रही। उन्होंने देशभर के मूर्तिकारों से छह माह तक समन्वय कर उन्हें काशी में इस राष्ट्रीय शिविर में भागीदारी के लिए आमंत्रित किया। डॉ. शत्रुघ्न प्रसाद ने बताया कि देश के विभिन्न राज्यों से आए 15 मूर्तिकार काशी विद्यापीठ के अतिथि हैं और यह कला उत्सव आगामी सप्ताह तक विश्वविद्यालय परिसर में निरंतर दर्शकों को आकर्षित करता रहेगा।

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