वाराणसी। सनातन परंपरा की अविरल धारा को जीवंत करती मौनी अमावस्या के पावन पर्व पर रविवार को काशी नगरी पूरी तरह आस्था, तप और भक्ति में डूबी नजर आई। तड़के ब्रह्म मुहूर्त से ही मोक्षदायिनी मां गंगा के तटों पर श्रद्धालुओं का विशाल सैलाब उमड़ पड़ा। 84 घाटों पर गंगा स्नान का सिलसिला शुरू होते ही पूरा वातावरण ‘हर-हर गंगे’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गूंज उठा। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वयं देवाधिदेव महादेव की नगरी में दिव्यता का उत्सव उतर आया हो।
मौनी अमावस्या पर गंगा स्नान का विशेष महत्व मानते हुए श्रद्धालुओं ने मौन व्रत के साथ पवित्र डुबकी लगाई और जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति तथा मोक्ष की कामना की। साधु-संतों, कल्पवासियों, महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं की उपस्थिति से घाटों पर आस्था का अनुपम दृश्य देखने को मिला। गंगा की लहरों में डूबती श्रद्धा और उगते सूर्य की किरणों के बीच काशी का हर घाट धर्म और अध्यात्म का जीवंत केंद्र बन गया।
स्नान के उपरांत घाटों पर दान-पुण्य का विशेष दौर चला। श्रद्धालुओं ने तिलदान, अन्नदान, वस्त्रदान और ब्राह्मण भोज कर पितृ तृप्ति व लोक-कल्याण की कामना की। तीर्थ-पुरोहितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत संकल्प कराए गए। जरूरतमंदों को दान देकर लोगों ने ‘मानव सेवा ही माधव सेवा’ की भावना को चरितार्थ किया। घाटों पर दान के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देर तक लगी रहीं।

गंगा स्नान और दान-पुण्य के बाद श्रद्धालु काशी के प्रमुख देवालयों की ओर उमड़ पड़े। श्री काशी विश्वनाथ धाम में बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। श्री काल भैरव मंदिर, संकटमोचन हनुमान मंदिर, दुर्गाकुंड सहित अन्य प्रमुख मंदिरों में भी भक्तों की भारी भीड़ देखी गई। शंखनाद, घंटा-घड़ियाल और आरती की ध्वनि से मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में डूबे रहे।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मौनी अमावस्या के दिन गंगा स्नान, मौन व्रत और दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। शास्त्रों में वर्णित है कि इस दिन किया गया दान और तप विशेष फलदायी होता है, वहीं काशी में किया गया प्रत्येक कर्म मोक्षदायी माना जाता है। इसी विश्वास के साथ देश-प्रदेश से आए श्रद्धालुओं ने काशी में आस्था की डुबकी लगाई।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। घाटों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। जल पुलिस, एनडीआरएफ की टीमें, सीसीटीवी निगरानी, खोया-पाया केंद्र और चिकित्सा सहायता की व्यवस्था सुनिश्चित की गई। नगर निगम व स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा स्वच्छता और श्रद्धालुओं की सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया।
मौनी अमावस्या के इस पावन अवसर पर पूरी काशी नगरी एक विशाल तीर्थ का रूप लिए नजर आई, जहां गंगा, घाट, मंदिर और श्रद्धालु—सब मिलकर आस्था और भक्ति के अद्भुत संगम के साक्षी बने।









