नई दिल्ली। जश्न-ए-रेख़्ता 2025 का पहला दिन: उर्दू अदब, मोहब्बत और तहज़ीब का संगम। राजधानी एक बार फिर उर्दू की नफासत, नज़ाकत और अदब से महक उठी। मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में जश्न-ए-रेख़्ता 2025 का शानदार आगाज़ हुआ। तीन दिनों तक चलने वाला यह उत्सव उर्दू भाषा, साहित्य, संगीत और तमाम सांस्कृतिक विरासत का अनूठा जश्न है, जिसमें देश–विदेश से उर्दू प्रेमी शिरकत कर रहे हैं।
उद्घाटन समारोह में सितारों की चमक
कार्यक्रम का शुभारंभ परंपरागत दीये जलाने की रस्म से किया गया। मंच पर दिल्ली के उपराज्यपाल, देश के दिग्गज शायर जावेद अख्तर, और मशहूर गीतकार–कवि ग़ुलज़ार साहब की मौजूदगी ने महफ़िल को और भी रोशन कर दिया। तालियों की गूंज और महफ़िल में मौजूद उर्दू-प्रेमियों का उत्साह देखने लायक था।

जावेद अख्तर ने अपने संबोधन में उर्दू की खूबसूरती और इंसानी रिश्तों से उसकी गहरी जुड़ाव पर बात की। वहीं ग़ुलज़ार साहब ने उर्दू को सिर्फ़ भाषा ही नहीं, बल्कि एक एहसास, एक तहज़ीब बताया — “उर्दू दिलों को जोड़ने वाली ज़बान है,” उन्होंने कहा।
कविता, संगीत और गुफ़्तगू से महका पहला दिन
पहले दिन कई सत्रों में उर्दू शायरी, कविताई नज़्मों, सूफ़ियाना संगीत और साहित्यिक चर्चाओं ने दर्शकों को बांधे रखा। मशहूर कवियों ने अपनी नज़्में और ग़ज़लें पेश कीं, जिन पर वाह-वाह की गूंज बार-बार सुनाई दी।
सांस्कृतिक मंच पर सूफ़ी संगीत ने लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कई कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति दी और शाम ढलते ही महफ़िल का रंग और भी परवान चढ़ गया।
किताबों की महक और उर्दू से जुड़ी गतिविधियां
स्टॉलों पर उर्दू किताबों की भरमार रही। क्लासिक साहित्य से लेकर आधुनिक लेखन तक का विशाल संग्रह लोगों को आकर्षित करता दिखा। उर्दू कैलिग्राफी, टाइपिंग वर्कशॉप्स, कविताई मुशायरे और सांस्कृतिक चर्चाओं में बड़ी संख्या में युवा भी शामिल हुए — यह संकेत है कि नई पीढ़ी भी उर्दू की खूबसूरती की ओर तेजी से लौट रही है।
आगे क्या?
अगले दो दिनों में जश्न-ए-रेख़्ता में कई चर्चित लेखक, अभिनेता, संगीतकार और शायर शामिल होंगे। मुशायरे, सूफ़ी नाइट, पुस्तक विमोचन, कहानी सत्र और सिने–साहित्य संवाद जैसे कार्यक्रम इस महोत्सव को और खास बनाने वाले हैं।
उर्दू अदब के इस रंगीन मेले ने दिल्ली की सर्द शाम में गर्माहट घोल दी। पहले दिन की रौनक देखकर साफ है कि आने वाले दो दिन और भी यादगार होने वाले हैं।









