वाराणसी। काशी की आध्यात्मिक परंपरा के केंद्र प्राचीन कामरूप मठ में 23 एवं 24 फरवरी को गुरु निर्वाण एवं तिरोधान तिथि पर दो दिवसीय भव्य धार्मिक आयोजन होगा। मठ परिसर श्रद्धा, साधना और वैदिक अनुष्ठानों से गुंजायमान रहेगा।
दशाश्वमेध स्थित मठ के महंत दंडी स्वामी शुद्धानंद तीर्थ महाराज ने पत्रकार वार्ता में बताया कि ब्रह्मलीन दंडी स्वामी बाणेश्वरानंद महाराज एवं स्वामी अच्युतानंद महाराज की पावन स्मृति में यह विशेष पूजन-अनुष्ठान आयोजित किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि 15 फरवरी को महाशिवरात्रि पर्व पर पूर्णेश्वर महादेव का रुद्राभिषेक, दिव्य श्रृंगार, चारों पहर की महाआरती एवं प्रसाद वितरण किया जाएगा, जिसके लिए तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं।

23 फरवरी को प्रातः गुरुदेव की मंगल आरती के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ होगा। इसके बाद पूर्णेश्वर महादेव का विधिवत पूजन, गुरु चरण पादुका पूजन तथा 11 ब्राह्मणों द्वारा श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ किया जाएगा। दोपहर में समष्टि भंडारे का आयोजन होगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करेंगे।
24 फरवरी को भव्य शोभायात्रा मणिकर्णिका घाट से प्रारंभ होकर हरिश्चंद्र घाट होते हुए पुनः आश्रम परिसर में पहुंचेगी। इस दौरान काशी के विभिन्न आश्रमों के दंडी स्वामियों का सम्मान एवं भंडारा कर विदाई दी जाएगी।
सायंकाल धर्म संसद का आयोजन होगा, जिसमें विद्वान संत-महात्माओं का सम्मान किया जाएगा तथा समस्त धार्मिक अनुष्ठानों का विधिवत समापन होगा।
आयोजन में सुमेरीपीठ के शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती एवं दक्षिणी विधायक नीलकंठ तिवारी को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है। देश-विदेश के विभिन्न मठों से जुड़े साधु-संत एवं शिष्यगण इस आध्यात्मिक आयोजन में सहभागिता करेंगे। कामरूप मठ में आयोजित यह दो दिवसीय कार्यक्रम काशी की सनातन परंपरा, गुरु-शिष्य संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत का जीवंत प्रतीक बनेगा।









