वाराणसी। साहित्य, संस्कृति और काव्य की भावपूर्ण अभिव्यक्तियों के बीच वरिष्ठ कवि एवं साहित्यकार इंजीनियर राम नरेश ‘नरेश’ का 70वां जन्मदिवस चंद्रा साहित्य परिषद (ट्रस्ट) के तत्वावधान में चितईपुर स्थित इंदिरा नगर कार्यालय पर काव्य गोष्ठी के रूप में हर्षोल्लास और गरिमा गरिमामयी वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर शहर और आसपास के क्षेत्रों से आए कवियों, साहित्यकारों और पत्रकारों ने अपनी रचनाओं की प्रस्तुति देकर कार्यक्रम को यादगार बना दिया। गोष्ठी की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध ग़ज़लकार कवि गिरीश पांडेय ‘काशिकेय’ ने की, जबकि संचालन श्रीनाथ सोनांचली (साहित्यिक मंच मधुपुर, सोनभद्र) ने प्रभावशाली ढंग से किया। कार्यक्रम का संयोजन चंद्रा साहित्य परिषद के सक्रिय सदस्य सी.एल. विश्वकर्मा द्वारा किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक विधि-विधान के साथ दीप प्रज्वलन कर किया गया। इसके बाद उपस्थित साहित्यकारों ने विद्या की अधिष्ठात्री देवी माता सरस्वती तथा स्व. चंद्रावती नरेश के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धा-सुमन अर्पित किए। इसके उपरांत उपस्थित कवियों और अतिथियों ने केक काटकर इंजीनियर राम नरेश ‘नरेश’ को माल्यार्पण किया तथा अंगवस्त्र ओढ़ाकर उनके दीर्घायु और स्वस्थ जीवन की कामना करते हुए जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।आयोजित काव्य गोष्ठी में कवियों ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं के माध्यम से वातावरण को काव्यमय बना दिया। कवि डॉ. छोटे लाल सिंह ‘मनमीत’ ने लोक परंपरा से जुड़े सोहर की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। वहीं जन्मदिन के नायक कवि इंजीनियर राम नरेश ‘नरेश’ ने अपना लोकप्रिय चैता गीत “कागा लेइके अबीर, उड़िजा बलम जोहत होइहैं” सुनाकर श्रोताओं को लोक संस्कृति की मधुरता से सराबोर कर दिया। इसके अतिरिक्त उपस्थित कवियों ने भी गीत, ग़ज़ल और काव्य रचनाओं की प्रस्तुति देकर कार्यक्रम को साहित्यिक ऊँचाई प्रदान की और जन्मदिन समारोह में चार चाँद लगा दिए। इस अवसर पर चंद्रा साहित्य परिषद (ट्रस्ट) के राष्ट्रीय अध्यक्ष इंजीनियर राम नरेश ‘नरेश’ ने कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे गिरीश पांडेय ‘काशिकेय’, कवि दीपक दबंग, प्रियदर्शी अशोक सिंह, वरिष्ठ पत्रकार डॉ. कैलाश सिंह ‘विकास’, पत्रकार आनंद सिंह ‘अन्ना’ सहित सभी उपस्थित साहित्यकारों, पत्रकारों और अतिथियों का स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि साहित्य समाज को दिशा देने का सशक्त माध्यम है और ऐसे आयोजन साहित्यिक परंपरा को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी कवियों, साहित्यकारों और अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि साहित्यिक गतिविधियों के माध्यम से समाज में संवेदना, संस्कार और संस्कृति की चेतना को आगे बढ़ाने का कार्य निरंतर जारी रहेगा।









