नई दिल्ली। देश में टैक्सी सेवाओं के बढ़ते बाजार और निजी ऐप आधारित कंपनियों के बढ़ते वर्चस्व के बीच अब एक ऐतिहासिक पहल की शुरुआत हो चुकी है। केंद्र सरकार के सहयोग से स्थापित ‘भारत टैक्सी’—भारत की पहली ड्राइवर-स्वामित्व वाली सहकारी कैब सेवा—ने औपचारिक रूप से अपना संचालन शुरू कर दिया है। इसके साथ ही ओला–उबर जैसी निजी कंपनियों की मनमानी पर अंकुश लगाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। सूत्रों के अनुसार, भारत टैक्सी का उद्देश्य देशभर के टैक्सी चालकों को आर्थिक मजबूती दिलाना और यात्रियों को पारदर्शी, सुरक्षित व किफायती सेवा उपलब्ध कराना है। यह प्लेटफ़ॉर्म किसी निजी कंपनी के नियंत्रण में नहीं, बल्कि ड्राइवरों की सहकारिता पर आधारित है। यानी प्रत्येक सदस्य ड्राइवर इस संस्था का हिस्सेदार होगा और उसकी कमाई पर किसी प्रकार का कमीशन नहीं लगाया जाएगा। ड्राइवरों को केवल एक नाममात्र की सदस्यता फीस देनी होगी, जबकि पूरी राइड की आय सीधे उनके खाते में जाएगी। शुरुआती चरण में यह सेवा दिल्ली और गुजरात में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू की गई है, जहाँ मात्र दस दिनों में ही 51,000 से अधिक ड्राइवर जुड़ चुके हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह शुरुआत ही सेवा के प्रति ड्राइवरों के विश्वास और उत्साह का संकेत है। संचालन का विस्तार अगले चरण में देश के अन्य महानगरों तक करने की योजना है। यात्रियों के लिए भी यह सेवा राहतभरी साबित हो सकती है, क्योंकि इसमें अचानक बढ़े किराए, सर्ज प्राइसिंग और बुकिंग में देरी जैसी परेशानियों से मुक्ति मिलने की उम्मीद है। ऐप को बहुभाषी, उपयोगकर्ता-अनुकूल और सरकारी निगरानी में विकसित किया गया है, जिससे सुरक्षा और पारदर्शिता दोनों को बढ़ावा मिलेगा।भारत टैक्सी को सहकारिता आंदोलन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया जा रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि यह मॉडल सफल रहता है तो देश में कैब सेवाओं का भविष्य पूरी तरह बदल सकता है और ड्राइवरों को आर्थिक स्वावलंबन के नए अवसर मिलेंगे।









