वाराणसी। बनारस के मुकीमगंज निवासी जनाब नसीर मंसूरी के नेतृत्व में रविवार को दर्जनों जायरीन अजमेर शरीफ दरगाह के लिए चादर लेकर रवाना हुए। रवाना होने से पूर्व चादर को आसपास के मोहल्लों में पूरे अकीदत और सम्मान के साथ घुमाया गया। इस दौरान जायरीनों ने ख्वाजा गरीब नवाज़ हज़रत मोइनुद्दीन चिश्ती (रज़ि.) के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए देश में अमन-चैन और भाईचारे की दुआ मांगी। नसीर मंसूरी ने बताया कि अजमेर शरीफ दरगाह पर चादर चढ़ाना सूफी परंपरा का अहम हिस्सा है, जो श्रद्धा, सम्मान और मन्नत पूरी होने का प्रतीक माना जाता है। चादर औलिया (संत) की दरगाह पर पेश कर जायरीन सुख-शांति, सद्भाव और आपसी मेल-मिलाप के लिए इबादत करते हैं। उन्होंने कहा कि ख्वाजा साहब की तपस्या और रूहानियत से जुड़ी यह परंपरा सदियों से चली आ रही है, जिसमें चादर पेश कर अपनी भावनाएं औलिया तक पहुंचाई जाती हैं। नसीर मंसूरी ने बताया कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी वह दर्जनभर लोगों के साथ चादर लेकर अजमेर शरीफ दरगाह जा रहे हैं। ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के 813वें उर्स के मौके पर दरगाह में चादरपोशी की जाएगी। उन्होंने कहा कि उर्स के दौरान दरगाह क्षेत्र में सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी, इंदिरा गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी, पी.वी. नरसिंहा राव सहित वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अब तक कई बार अजमेर शरीफ दरगाह में चादर भिजवा चुके हैं। इस वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से 11वीं बार चादर पेश की जा रही है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने जयपुर में दिए बयान में कहा था कि उन्हें उर्स के दौरान पीएम मोदी की ओर से चादर चढ़ाने का अवसर मिला है। अजमेर शरीफ दरगाह हमेशा से आपसी भाईचारे, सद्भाव और शांति का संदेश देती रही है। नसीर मंसूरी ने कहा कि चादरपोशी के बाद देश में अमन-शांति, भाईचारा और आपसी सौहार्द कायम रहने की दुआ की जाएगी। इस मौके पर शकील मंसूरी उर्फ बाबू, आसिफ मंसूरी, आरिफ मंसूरी, शेरे आलम, मेहरून निशा, शौकत अली मंसूरी, फैजान अली मंसूरी, जहाना बेगम, गुलशन, सगीर मंसूरी, रेशमा बानो, कुमारी आरजू, तानिया मंसूरी, ताबिश मंसूरी, तबस्सुम नाज, नाजमुद्दीन उर्फ राजा, साहिल मंसूरी, इरशाद मंसूरी, इमरान मंसूरी, अब्दुल सलीम मंसूरी उर्फ पप्पू सहित बड़ी संख्या में मुस्लिम बंधु शामिल रहे।









