वाराणसी। शिक्षा को जीवन का आधार मानकर चार दशक तक समर्पित भाव से अध्यापन करने वाले वरिष्ठ शिक्षक माता प्रसाद मिश्र के सेवानिवृत्ति अवसर पर गोलघर स्थित पराड़कर स्मृति भवन के सभागार में भव्य सम्मान समारोह एवं संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षकों, विद्वानों, पत्रकारों और गणमान्य नागरिकों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए विद्वान वक्ता भोलानाथ मिश्रा ने कहा कि माता प्रसाद मिश्र बचपन से ही विलक्षण प्रतिभा के धनी रहे हैं। उन्होंने सदैव तर्क-वितर्क के साथ ज्ञानार्जन की जिज्ञासा को बनाए रखा और अपने अध्यापन के माध्यम से विद्यार्थियों में भी वही जिज्ञासा विकसित की। उन्होंने मिश्र के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
रिद्धिमा मिश्रा ने अपने भावुक संबोधन में कहा कि यह अवसर सभी के लिए गर्व और भावनाओं से भरा हुआ है। उन्होंने कहा कि माता प्रसाद मिश्र केवल एक शिक्षक ही नहीं, बल्कि एक सच्चे मार्गदर्शक और प्रेरणा स्रोत रहे हैं। हिंदी भाषा पर उनकी अद्भुत पकड़ और गहन ज्ञान ने असंख्य विद्यार्थियों को सही दिशा प्रदान की। उनके शिक्षण का दायरा केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने जीवन मूल्यों को भी गहराई से आत्मसात कराया।

उन्होंने यह भी बताया कि माता प्रसाद मिश्र का ज्ञान केवल शैक्षणिक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने 18 पुराणों का गहन अध्ययन किया है, जो उनके धार्मिक और आध्यात्मिक झुकाव को दर्शाता है। हिंदू शास्त्रों के प्रति उनकी गहरी समझ सभी के लिए प्रेरणादायक है।
माता प्रसाद मिश्र बंदेपुर पूर्व माध्यमिक विद्यालय, वाराणसी से सेवानिवृत्त हुए हैं। कार्यक्रम का संचालन प्रमोद कुमार उर्फ ज्वाले चाचा, रिद्धिमा मिश्रा एवं शिवमूर्ति दूबे ने संयुक्त रूप से किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन शिक्षक अश्विनी कुमार मिश्रा ने प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर रुद्रनाथ मिश्र, हरीश कुमार पाठक, पुरुषोत्तम जोशी, सुशील कुमार मिश्रा, रेवांतक मिश्रा, मंजू मिश्रा, शशिधर पाण्डेय, आनंद सिंह अन्ना सहित सैकड़ों शिक्षक, पत्रकार एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।









