वाराणसी। सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी में कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा की अध्यक्षता में रविवार अपराह्न 12:30 बजे योगसाधना केन्द्र में आयोजित विद्या परिषद् की महत्वपूर्ण बैठक में विश्वविद्यालय के शैक्षिक, अनुसंधान एवं सांस्कृतिक विकास से जुड़े कई अहम प्रस्तावों को सर्वसम्मति से स्वीकृति प्रदान की गई। यह निर्णय विश्वविद्यालय को ज्ञान संरक्षण, अध्यापक शिक्षा और अनुसंधान उत्कृष्टता के क्षेत्र में नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।
बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के साथ प्रस्तावित समझौता ज्ञापन (MoU) रहा। परिषद् ने मंत्रालय द्वारा भेजे गए प्रस्ताव को स्वीकृति देते हुए शीघ्र ही विधिवत प्रक्रिया के तहत समझौता सम्पन्न करने का निर्णय लिया। इस पहल का उद्देश्य जनजातीय समुदायों की पारंपरिक ज्ञान-प्रणालियों, भाषाओं, लोककलाओं एवं सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण, पुनर्जीवन और संस्थागत विकास करना है। इसके अंतर्गत विश्वविद्यालय द्वारा उपाधि एवं प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रम संचालित किए जाएंगे, जिससे कौशल विकास, आत्मनिर्भरता और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिलेगा।
इसी क्रम में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के अंतर्गत संचालित अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केन्द्र (आईयूसीटीई), वाराणसी के साथ शैक्षणिक एवं शोध सहयोग के प्रस्ताव को भी परिषद् ने मंजूरी दी। यह स्वायत्त केन्द्र अध्यापक शिक्षा, शोध, पाठ्यक्रम निर्माण एवं मूल्यांकन प्रणाली में उच्च गुणवत्ता और नवाचार को प्रोत्साहित करेगा। साथ ही विद्या-वाचस्पति कार्यक्रमों के संचालन एवं बहुविषयक शैक्षिक संवाद को भी सुदृढ़ करेगा। प्रस्तावों पर विचार करते हुए यह स्पष्ट किया गया कि विश्वविद्यालय एक ओर जनजातीय ज्ञान परंपराओं को संरक्षित कर उन्हें मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर अध्यापक शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता और अनुसंधान को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है। यह पहल परंपरा और आधुनिकता के संतुलित समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है।

इस अवसर पर कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय का लक्ष्य भारतीय ज्ञान परंपरा को संरक्षित करते हुए उसे आधुनिक शिक्षा प्रणाली से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि जनजातीय कार्य मंत्रालय के साथ प्रस्तावित समझौता सांस्कृतिक विविधता को सशक्त करेगा, जबकि आईयूसीटीई के साथ सहयोग अध्यापक शिक्षा एवं अनुसंधान में उत्कृष्टता सुनिश्चित करेगा। इन पहलों से विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विशिष्ट पहचान मिलेगी।
विद्या परिषद् के इन निर्णयों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप बहुविषयक शिक्षा, अनुसंधान-आधारित दृष्टिकोण और भारतीयता पर आधारित ज्ञान प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
बैठक में कुलसचिव राकेश कुमार, परीक्षा नियंत्रक दिनेश कुमार, प्रो. जितेन्द्र कुमार, प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल, प्रो. विधु द्विवेदी, प्रो. शैलेश कुमार मिश्र, प्रो. रमेश प्रसाद, प्रो. महेन्द्र पांडेय, प्रो. अमित कुमार शुक्ल, डॉ. विशाखा शुक्ला एवं डॉ. दिव्य चेतन ब्रह्मचारी सहित विश्वविद्यालय के अनेक वरिष्ठ प्राध्यापक एवं अधिकारी उपस्थित रहे।









