वाराणसी। मोक्षदायिनी गंगा नदी के पावन घाटों को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाए रखने के लिए नगर निगम वाराणसी ने एक अभिनव पहल की शुरुआत की है। अब घाटों पर श्रद्धालुओं द्वारा छोड़े जाने वाले पुराने वस्त्र और पूजन सामग्री के लिए ‘अर्पण कलश’ स्थापित किए जा रहे हैं। इसकी शुरुआत सोमवार को अस्सी घाट से की गई।
नगर निगम की इस पहल का उद्देश्य घाटों की स्वच्छता बनाए रखने के साथ-साथ श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान करना भी है। अक्सर देखा जाता था कि स्नान के बाद लोग पुराने कपड़े, माला, फूल और अन्य पूजन सामग्री घाट की सीढ़ियों पर छोड़ देते थे, जिससे गंदगी फैलती थी और घाटों की सुंदरता प्रभावित होती थी। अब ‘अर्पण कलश’ के माध्यम से इस समस्या का व्यवस्थित समाधान किया जाएगा।
इस योजना के तहत प्रथम चरण में शहर के छह प्रमुख घाटों को शामिल किया गया है। अस्सी घाट के बाद जल्द ही दशाश्वमेध घाट, राजघाट, पंचगंगा घाट, केदार घाट और सिंधिया घाट पर भी ये कलश लगाए जाएंगे। ये सभी घाट आस्था और श्रद्धा के प्रमुख केंद्र हैं, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

नई व्यवस्था के तहत श्रद्धालु अपने पुराने वस्त्र और पूजन सामग्री सीधे ‘अर्पण कलश’ में डाल सकेंगे। साथ ही, घाटों पर तैनात सफाईकर्मी भी बिखरी सामग्री को एकत्र कर कलश में सुरक्षित रूप से रखेंगे। इससे न केवल गंदगी कम होगी, बल्कि पूजन सामग्री के अपमान की स्थिति से भी बचाव होगा।
काशी विश्वनाथ धाम के भव्य स्वरूप के बाद वाराणसी में श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और गंगा स्नान के लिए पहुंच रहे हैं, जिससे घाटों पर दबाव बढ़ा है। ऐसे में यह पहल कचरा प्रबंधन को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
अपर नगर आयुक्त सविता यादव ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि घाटों की स्वच्छता बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि ‘अर्पण कलश’ का उपयोग कर न केवल गंदगी कम की जा सकती है, बल्कि गंगा की पवित्रता और मर्यादा भी बनी रखी जा सकती है।
नगर निगम ने श्रद्धालुओं से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि वे पूजन सामग्री और वस्त्र निर्धारित ‘अर्पण कलश’ में ही डालें, ताकि काशी के घाट स्वच्छ, सुंदर और पवित्र बने रहें।









