वाराणसी। महाकवि जयशंकर प्रसाद की जयंती के अवसर पर संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से उनके आवास तक एक भव्य साहित्यिक पदयात्रा निकाली गई। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने हरी झंडी दिखाकर पदयात्रा का शुभारंभ किया।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. शर्मा ने कहा कि ऐसी पदयात्राएं महाकवि प्रसाद की कृतियों, उनके साहित्यिक अवदान और सांस्कृतिक धरोहर को संजोने तथा आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम हैं। काशी की हिन्दी साहित्य परंपरा ने न केवल देश में बल्कि पूरी दुनिया में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। प्रसाद जी के साहित्य ने हिन्दी को ऐसा अमूल्य तोहफा दिया है, जिसे सदियों तक याद रखा जाएगा।
उन्होंने कहा कि पदयात्रा के माध्यम से प्रसाद का साहित्य आम पाठकों से सीधे जुड़ सकेगा, जिससे साहित्य के प्रति जनसरोकार और अधिक मजबूत होगा।

पदयात्रा की संयोजक एवं महाकवि प्रसाद की प्रपौत्री डॉ. कविता प्रसाद ने बताया कि यह पहली बार इस प्रकार की यात्रा आयोजित की गई है, लेकिन अब यह हर वर्ष प्रसाद की जयंती पर निकाली जाएगी। इसका उद्देश्य हिन्दी के विद्यार्थियों के साथ-साथ आम पाठकों को भी साहित्य से जोड़ना है।
वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. इंदीवर ने इसे हिन्दी साहित्य को जनमानस से जोड़ने का एक अनूठा और प्रभावशाली प्रयास बताया। पदयात्रा में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. कवीन्द्र नारायण, प्रो. श्रद्धानंद, डॉ. अत्रि भारद्वाज, कवि गणेश गंभीर सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी एवं छात्र-छात्राएं शामिल हुए।









