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सनबीम वरुणा का वार्षिकोत्सव ‘काशी एक उत्सव’: शाश्वत नगरी की दिव्यता को समर्पित भव्य प्रस्तुति

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वाराणसी। सनबीम वरुणा का वार्षिकोत्सव शुक्रवार को अत्यंत उल्लास और गरिमा के साथ सम्पन्न हुआ। “काशी एक उत्सव” थीम पर आधारित इस आयोजन में लगभग 450 विद्यार्थियों ने सहभागिता कर काशी की अनंत, शाश्वत और आध्यात्मिक दिव्यता को जीवंत मंचन के माध्यम से प्रस्तुत किया। रंगारंग कार्यक्रमों और सशक्त मंच प्रस्तुतियों ने अभिभावकों व उपस्थित गणमान्य अतिथियों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यार्थियों की आकर्षक बैगपाइप प्रस्तुति से हुआ, जिसके माध्यम से शिक्षण समूह के सम्मानित सदस्यों का भव्य स्वागत किया गया। इसके पश्चात विद्यालय की प्रधानाचार्या ममता जायसवाल ने अपनी टीम के साथ विद्यालय की वार्षिक गतिविधियों पर आधारित रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस अवसर पर विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।

उद्घाटन सत्र में महान संगीतज्ञ पंकज उधास, उस्ताद जाकिर हुसैन, पंडित छन्नूलाल मिश्र, राजन मिश्रा एवं पंडित ईश्वरी लाल मिश्रा को समर्पित ‘स्वरांगिनी आर्केस्ट्रा’ की भावपूर्ण प्रस्तुति ने श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके उपरांत ‘लक्ष्मी चायवाला’ नामक अनूठे नाट्य खंड ने दर्शकों को सामाजिक सरोकारों से जोड़ा, जो आगे चलकर देव दीपावली के भव्य दृश्यांकन में परिवर्तित हुआ—काशी की दिव्यता और आध्यात्मिक प्रकाश का सशक्त प्रतीक।

वार्षिकोत्सव का उद्घाटन शिक्षण समूह के अध्यक्ष डॉ. दीपक मधोक, उपाध्यक्ष भारती मधोक, निर्देशिका अमृता बर्मन, उपनिदेशिका प्रतिमा गुप्ता तथा मानक निदेशक हर्ष मधोक द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर किया गया। कार्यक्रम के मध्य विद्यालय के कैलेंडर और सनबीम वेबसाइट का लोकार्पण भी किया गया।

आकर्षण का केंद्र भव्य रैंप वॉक फैशन शो रहा, जिसमें कक्षा एक से आठ तक के लगभग 50 विद्यार्थियों ने अपने अभिभावकों के साथ पारंपरिक बनारसी परिधानों की गरिमा और शान को आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत किया। इसके बाद संत रविदास और कबीर दास के जीवन, उनके विचारों तथा सामाजिक समरसता के संदेशों को छात्रों ने प्रभावी भाव-भंगिमाओं से मंच पर उतारा।

काशी की लोक परंपराओं को समर्पित प्रस्तुतियों में भरत मिलाप, नागनाथैया और नककटैया लीला का जीवंत मंचन किया गया। ‘काशी 2.0’ की अवधारणा पर आधारित नुक्कड़ नाटक ने समकालीन सामाजिक संदेशों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। समापन से पूर्व ‘रुद्र रिदम शंकरा’ में मयंक खान रामचंदानी ने शिव के तांडव, शक्ति और सृजन के अद्भुत संगम को सशक्त नृत्य के माध्यम से दर्शाया।

समापन अवसर पर शिक्षण समूह के अध्यक्ष डॉ. दीपक मधोक, उपाध्यक्ष भारती मधोक, मानद निदेशक हर्ष मधोक, निर्देशिका अमृता बर्मन एवं उपनिदेशिका प्रतिमा गुप्ता ने “काशी एक उत्सव” की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों की सराहना की, अभिभावकों के प्रति आभार व्यक्त किया और छात्रों को निरंतर उत्कृष्टता के लिए प्रेरित किया। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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