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VB-G RAM-G बिल 2025 लोकसभा में पेश, मनरेगा की जगह लेने पर सियासी संग्राम तेज

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नई दिल्ली। लोकसभा में बुधवार को केंद्र सरकार ने विकसित भारत – रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) गारंटी बिल, 2025 पेश किया। इसे संक्षेप में VB-G RAM-G बिल कहा जा रहा है। सरकार का दावा है कि यह विधेयक दो दशक पुराने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) की जगह लेकर ग्रामीण भारत में रोजगार और आजीविका की नई संरचना तैयार करेगा। हालांकि, विधेयक के पेश होते ही विपक्ष ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। कांग्रेस महासचिव एवं वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने इसे मनरेगा को “कमजोर करने वाला” करार देते हुए सदन में तीखी आपत्ति जताई। लोकसभा में बहस के दौरान प्रियंका गांधी ने कहा कि बिना व्यापक चर्चा और सलाह-मशविरा के किसी भी कानून को जल्दबाजी में पारित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार यह विधेयक “व्यक्तिगत जुनून और पक्षपात” के तहत लाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा, “इस बिल को बिना पर्याप्त विमर्श के पारित करना गलत होगा। इसे वापस लेकर विस्तृत जांच के लिए संसदीय स्थायी समिति को भेजा जाना चाहिए। कोई भी कानून व्यक्तिगत आग्रह या भेदभाव के आधार पर जबरन नहीं थोपा जाना चाहिए।” प्रियंका गांधी ने मनरेगा में मजदूरी भुगतान में हो रही देरी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर मजदूरों को समय से भुगतान नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा, “मुझे केवल नाम बदलने की समझ नहीं आती। यह नया बिल 100 दिन के रोजगार की मौजूदा गारंटी को कमजोर करेगा। आप कहीं भी जाइए, मनरेगा मजदूर यही बताएंगे कि उन्हें समय पर मजदूरी नहीं मिलती।” इससे पहले केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लोकसभा से विधेयक पेश करने की अनुमति मांगी। उन्होंने कहा कि नया कानून ग्रामीण परिवारों को अधिक सशक्त बनाएगा और रोजगार के साथ-साथ टिकाऊ ग्रामीण परिसंपत्तियों के निर्माण में मदद करेगा। सरकार के अनुसार, VB-G RAM-G बिल के तहत प्रत्येक ग्रामीण परिवार के सक्षम वयस्क सदस्य को 125 दिन की मजदूरी आधारित रोजगार गारंटी दी जाएगी, जो मौजूदा 100 दिन की सीमा से अधिक है। यह रोजगार उन लोगों के लिए होगा जो बिना कौशल वाले कार्य करने को तैयार हैं। सरकार का दावा है कि यह विधेयक राष्ट्रीय स्तर पर समन्वित विकास रणनीति के माध्यम से आय सुरक्षा के साथ-साथ उत्पादकता बढ़ाने वाली ग्रामीण संपत्तियों के निर्माण पर केंद्रित है। विधेयक के पेश होते ही यह स्पष्ट हो गया है कि आने वाले दिनों में मनरेगा के भविष्य और नए रोजगार मॉडल को लेकर संसद में राजनीतिक टकराव और तेज होगा।

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