वाराणसी। वर्ष 2010-11 में हुए आंदोलन से जुड़े एक मामले में लगभग 16 वर्षों तक चली लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाते हुए सात आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। इस निर्णय के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर दौड़ गई है।
ज्ञात हो कि वर्ष 2010-11 में तत्कालीन सरकार की नीतियों के विरोध में नगर निगम परिसर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा लोकतांत्रिक आंदोलन किया गया था। इस दौरान प्रशासनिक कार्रवाई में कांग्रेस नेता राघवेंद्र चौबे, अरविंद किशोर राय, राजेन्द्र मिश्रा, घनश्याम सिंह, पुन्नूलाल बिन्द, गुलाम हैदर, प्रमोद सोनकर सहित अन्य साथियों पर गंभीर आरोप लगाए गए थे।
मामले की सुनवाई के दौरान सभी पक्षों के तर्क, साक्ष्य और परिस्थितियों का गहन परीक्षण करते हुए न्यायालय ने 30 मार्च 2026 को अपना अंतिम निर्णय सुनाया, जिसमें सभी आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया गया।

इस अवसर पर महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने कहा, “कांग्रेस के कार्यकर्ता डरने वाले नहीं हैं। हम हमेशा से गलत नीतियों का विरोध करते आए हैं और आम जनता के हित में संघर्ष करते रहे हैं। हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था। जैसा कि कहा जाता है—‘ईश्वर के घर देर है, अंधेर नहीं’, आज यह सच साबित हुआ है। यह सत्य और न्याय की जीत है।”
उन्होंने आगे कहा कि वर्षों तक साथियों ने संघर्ष किया और अंततः न्यायपालिका ने सच्चाई को स्वीकार किया। “हम न्यायालय का हृदय से धन्यवाद देते हैं, जिसने निष्पक्ष और साहसिक निर्णय दिया। आगे भी हम जनहित के मुद्दों पर संघर्ष जारी रखेंगे।”
राघवेंद्र चौबे ने यह भी आरोप लगाया कि उस समय शासन-प्रशासन ने लोकतांत्रिक आंदोलन को दबाने के उद्देश्य से निर्दोष लोगों पर मुकदमा दर्ज किया था, लेकिन सच्चाई को ज्यादा समय तक दबाया नहीं जा सकता। आज के फैसले ने यह सिद्ध कर दिया है कि सत्य अंततः विजयी होता है।
उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ता हरिशंकर सिंह एवं उनकी टीम के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी निष्ठा, मेहनत और समर्पण से ही यह सकारात्मक परिणाम संभव हो सका।









