वाराणसी। जाड़े की दस्तक के साथ एक बार फिर काशी की गंगा में विदेशी मेहमानों का आगमन शुरू हो गया है। उत्तर दिशा से हजारों मील का सफर तय कर साइबेरिया से आए प्रवासी पंछियों ने गंगा तटों का आकाश मानो अपने पंखों से रंग दिया है। ठंडी हवाओं के बीच गंगा की
बहती धारा अब श्वेत चादर ओढ़े ऐसी प्रतीत होती है मानो मां गंगा ने खुद को इन अतिथि पंछियों की उड़ान से सजाया हो।अस्सी, राजघाट, और पंचगंगा जैसे घाटों पर तड़के ही इन पक्षियों की कलरव से वातावरण गूंज उठता है। नाविकों की पतवारों के बीच उड़ते पंछी पर्यटकों और स्थानीय लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। इन पंछियों की शांति और गंगा की भक्ति-मय लहरों का संगम एक अद्भुत दृश्य उपस्थित करता है जो हर आगंतुक को मंत्रमुग्ध कर देता है।स्थानीय पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि हर वर्ष की तरह इस बार भी साइबेरियन पंछियों का आगमन गंगा के स्वच्छ वातावरण और मौसम के संतुलन का संकेत है। ठंड बढ़ने के साथ इनकी संख्या में और वृद्धि होने की संभावना है, जिससे काशी के घाटों पर सर्दियों का सौंदर्य और भी निखर उठेगा।









