वाराणसी। काशी की समृद्ध सांस्कृतिक और साहित्यिक परंपरा को जीवंत बनाए रखने वाली प्रतिष्ठित संस्था शनिवार गोष्ठी द्वारा बहुप्रतीक्षित वार्षिक आयोजन “महामूर्ख सम्मेलन” का 58वाँ संस्करण इस वर्ष भी भव्य रूप में आयोजित किया जाएगा।
पिछले पाँच दशकों से निरंतर आयोजित हो रहा यह ऐतिहासिक सम्मेलन काशी की साहित्यिक विरासत का प्रतीक बन चुका है और आज देश के प्रमुख हास्य-व्यंग्य आयोजनों में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर चुका है। प्रत्येक वर्ष की तरह इस बार भी यह आयोजन 1 अप्रैल को राजेंद्र प्रसाद घाट, वाराणसी में आयोजित होगा, जिसमें 10 हजार से अधिक दर्शकों की उपस्थिति की संभावना है।
यह कार्यक्रम न केवल वाराणसी बल्कि आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में श्रोताओं को आकर्षित करता है। काशी की मान्यता के अनुसार, जब अंग्रेजों द्वारा हिंदू नववर्ष के महत्व को कम करने के लिए “एप्रिल फूल डे” को बढ़ावा दिया गया, तब यहां के विद्वानों और साहित्यकारों ने इसके विरोध में हास्य-व्यंग्य का मार्ग अपनाया। इसी सोच के साथ महामूर्ख सम्मेलन की परंपरा की शुरुआत हुई, जिसका उद्देश्य समाज को जागरूक करना और जनमानस तक सार्थक संदेश पहुँचाना रहा है।

स्वतंत्रता के बाद काशी के साहित्यिक पुरोधाओं स्व. चकाचक बनारसी, स्व. धर्मशील चतुर्वेदी एवं सांड बनारसी ने इस परंपरा को संगठित रूप देकर इसे साहित्य, हास्य, कला और जनजागरण का सशक्त मंच बनाया।
इस वर्ष सम्मेलन की थीम वर्तमान समय में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराध और वित्तीय धोखाधड़ी पर केंद्रित है। इसी क्रम में “एप्रिल फूल डे” को “एंटी फ्रॉड डे” के रूप में मनाया जाएगा। कार्यक्रम में साइबर फ्रॉड एवं अपराध जागरूकता पर विशेष सत्र आयोजित होगा, जिसमें पुलिस कमिश्नरेट वाराणसी के साइबर क्राइम विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहकर आमजन को जागरूक करेंगे।
पत्रकार वार्ता में दिलीप सिंह, रमेश पांडे, महेश चंद्र महेश्वरी, दमदार बनारसी सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।









