वाराणसी। मेरा युवा भारत द्वारा आयोजित अंतर-राज्यीय युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम के तीसरे दिन चांदमारी में पांच दिवसीय आवासीय शिविर ने युवाओं को प्रेरणा का अनमोल तोहफा दिया। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ की असिस्टेंट प्रोफेसर डा. दीपमाला सिंह बघेल ने मुख्य वक्ता के रूप में वैश्वीकरण के दौर में युवा जीवन में मनोविज्ञान की भूमिका पर गहन व्याख्यान दिया।डा. बघेल ने कहा कि प्रतिस्पर्धा के इस युग में युवा तनाव, असफलता की आशंका और मानसिक दबाव से जूझ रहे हैं। सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और मानसिक संतुलन ही सफलता की कुंजी हैं। उन्होंने युवाओं को असफलताओं से निराश न होने, उनसे सबक लेने, धैर्य धारण करने और लगातार प्रयासरत रहने का संदेश दिया। जिला युवा अधिकारी यतेंद्र सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया।इससे पूर्व संरक्षण अधिकारी निरुपमा सिंह ने महिलाओं से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर प्रकाश डालते हुए केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं—जैसे बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, उज्ज्वला योजना और अन्य—की विस्तृत जानकारी साझा की। यूपी कॉलेज के प्रो. सुधीर कुमार राय ने काशी के गौरवशाली इतिहास, समृद्ध संस्कृति और परंपराओं से प्रेरित जीवन मूल्यों पर प्रकाश डाला। प्रो. रंजना ने वैश्वीकरण के प्रभाव में हिंदी व संस्कृत भाषाओं के संरक्षण की अनिवार्यता पर बल देते हुए युवाओं को सांस्कृतिक जागरूकता का आह्वान किया।कार्यक्रम में तनीषा ठाकुर, राज कुमार, राकेश यादव, सिविल डिफेंस के डिप्टी डिवीजनल वार्डेन अरविंद विश्वकर्मा, अंजनी सिंह, डा. नंद किशोर सहित बड़ी संख्या में युवा प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। यह सत्र युवाओं के समग्र विकास में मील का पत्थर साबित हुआ।









