वाराणसी, 19 दिसम्बर 2025। ऊर्जा विभाग के निजीकरण के विरोध में उत्तर प्रदेश विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले चल रहा आंदोलन शुक्रवार को 387वें दिन भी जारी रहा। बनारस में बिजलीकर्मियों ने अन्य जनपदों की तरह जोरदार प्रदर्शन करते हुए निजीकरण को ऊर्जा प्रबंधन की असफलता बताया।वक्ताओं ने कहा कि ऊर्जा निगमों में सुधार की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन प्रबंधन सुधार नहीं करना चाहता। उन्होंने केंद्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपद नाइक के संसद में दिए गए बयान का हवाला देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में विद्युत वितरण निगमों की हानियां 10 प्रतिशत तक घटी हैं, जो राष्ट्रीय औसत से केवल 4 प्रतिशत अधिक हैं। समय पर भर्ती और प्रबंधन में सुधार से यह अंतर भी कम किया जा सकता है।संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि पिछले एक वर्ष में पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन कर्मचारियों, संविदा कर्मियों, जूनियर इंजीनियरों और अभियंताओं का लगातार उत्पीड़न कर रहा है। इन उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों से ऊर्जा निगमों में अघोषित आपातकाल जैसा माहौल बन गया है और विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।समिति के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि आंदोलन के नाम पर की जा रही सभी दमनात्मक कार्रवाइयों को वापस लिया जाए, ताकि बिजली कर्मचारी उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा दे सकें। उन्होंने कहा कि बिजली कर्मियों का मुख्यमंत्री पर पूरा विश्वास है और वे उनके नेतृत्व में ऊर्जा व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।संघर्ष समिति ने सभी बिजलीकर्मियों से अपील की है कि निजीकरण विरोधी आंदोलन के दौरान उपभोक्ताओं की समस्याओं का तुरंत समाधान करें और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा लागू बिजली बिल राहत योजना 2025 में पूरा सहयोग दें।सभा को ई. एस.के. सिंह, अंकुर पांडेय, राजेश सिंह, हेमंत श्रीवास्तव, अभिषेक सिंह, अभिषेक शुक्ला, आशुतोष पांडेय, गुलशन कुमार, जे.पी. श्रीवास्तव, आजाद कुमार, आदित्य कुमार और सुबोध श्रीवास्तव ने संबोधित किया।









