Follow us on

Home » संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय » परशुराम जयंती: धर्म, शौर्य और नैतिक नेतृत्व का अद्भुत संगम — कुलपति प्रो॰ बिहारी लाल शर्मा

परशुराम जयंती: धर्म, शौर्य और नैतिक नेतृत्व का अद्भुत संगम — कुलपति प्रो॰ बिहारी लाल शर्मा

Share this post:

 

वाराणसी, 19 अप्रैल 2026। वैशाख शुक्ल तृतीया के पावन अवसर पर भगवान परशुराम जयंती देशभर में श्रद्धा, आस्था और सांस्कृतिक उल्लास के साथ मनाई जा रही है। इस अवसर पर सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो॰ बिहारी लाल शर्मा ने अपने संदेश में कहा कि भगवान परशुराम का जीवन केवल पौराणिक आख्यान नहीं, बल्कि समकालीन समाज के लिए एक सशक्त नैतिक दर्शन प्रस्तुत करता है, जो आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना प्राचीन काल में था।

कुलपति ने कहा कि भगवान परशुराम, जिन्हें भगवान विष्णु का छठा अवतार माना जाता है, ज्ञान और शक्ति के अद्वितीय समन्वय के प्रतीक हैं। महर्षि जमदग्नि और माता रेणुका के पुत्र परशुराम ने तप, त्याग, संयम और शौर्य के माध्यम से धर्म की पुनः स्थापना की। कार्तवीर्य अर्जुन जैसे अत्याचारी शासकों के विरुद्ध उनका संघर्ष इस बात को रेखांकित करता है कि शक्ति का प्रयोग सदैव न्याय और लोककल्याण के लिए होना चाहिए।

उन्होंने समसामयिक संदर्भों में कहा कि वर्तमान युग में जब समाज विभिन्न विषमताओं, नैतिक चुनौतियों और मूल्यों के संकट से जूझ रहा है, तब भगवान परशुराम का आदर्श मार्गदर्शक बनकर सामने आता है। उनका जीवन यह सिखाता है कि शासन-व्यवस्था और नेतृत्व का आधार नैतिकता, पारदर्शिता और जनकल्याण होना चाहिए।

कुलपति ने शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज की शिक्षा-व्यवस्था में केवल ज्ञानार्जन ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि चरित्र-निर्माण और आत्मानुशासन का समावेश भी अनिवार्य है। भगवान परशुराम ‘ब्राह्मतेज’ और ‘क्षात्रतेज’ के समन्वय के प्रतीक हैं, जो यह संदेश देते हैं कि समाज के संतुलित विकास के लिए बौद्धिक क्षमता और साहस—दोनों आवश्यक हैं।

युवाओं का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि वे परशुराम के जीवन से प्रेरणा लेकर अन्याय और अधर्म के विरुद्ध सजग रहें तथा अपने कर्तव्यों के प्रति निष्ठावान बनें। उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल युग में आत्मसंयम, अनुशासन और नैतिकता का महत्व और भी बढ़ गया है, जिसे अपनाकर ही एक सशक्त और संस्कारित समाज का निर्माण किया जा सकता है।

पर्यावरण संरक्षण के संदर्भ में उन्होंने कहा कि भगवान परशुराम का जीवन प्रकृति के साथ संतुलित सह-अस्तित्व का संदेश देता है, जो आज की पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान के लिए अत्यंत प्रेरणादायक है।

अंत में कुलपति ने कहा कि भगवान परशुराम जयंती हमें यह संकल्प लेने का अवसर देती है कि हम अपने व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में धर्म, न्याय और करुणा के सिद्धांतों का पालन करें। यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी और इसी मार्ग पर चलकर एक समरस, सशक्त और नैतिक समाज की स्थापना संभव है।

लेखक के बारे में

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments

खबरें और भी हैं...

लाइव क्रिकट स्कोर

मौसम अपडेट

राशिफल

0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x