दुबई एयर शो-2025 का आखिरी दिन भारतीय वायुसेना के लिए काले दिन में बदल गया, जब तेजस फाइटर जेट का बहादुरी से उड़ान भरने वाला विंग कमांडर नमांश स्याल एक दर्दनाक दुर्घटना में शहीद हो गए। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के पटियालकर गांव के यह वीर पुत्र, जिनकी उम्र मात्र 34-35 वर्ष थी, ने अपनी अदम्य बहादुरी और समर्पण से पूरी दुनिया को भारतीय वीरता का परिचय दिया।नमांश स्याल भारतीय वायुसेना के अनुभवी और कुशल पायलट थे, जिन्होंने 2009 में सेवा में प्रवेश किया था। उन्हें स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रतिष्ठित करने की उच्च जिम्मेदारी सौंपी गई थी। दुबई एयर शो के अंतिम दिन एक अत्यंत चुनौतीपूर्ण एरोबेटिक प्रदर्शन के दौरान भारी पीड़ा और शोक की घड़ी आई, जब उनका विमान अचानक नाक के बल नीचे गिर गया और आग की लपटों में समा गया। दुर्भाग्यवश, पायलट को विमान से बाहर निकलने का अवसर भी नहीं मिल सका।नमांश स्याल न केवल हिमाचल के लिए, बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व का प्रतीक थे। उनकी पत्नी अफशां भी भारतीय वायुसेना की अधिकारी हैं, और वे अपनी छह वर्षीय बेटी के साथ दुबई में रहती थीं। उनके बलिदान पर हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सहित पूरे देश ने गहरा दुःख व्यक्त किया तथा भारतीय वायुसेना ने हादसे की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं।इस दुखद घटना ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि देश की रक्षा में जुटे हमारे जवान अपनी जान की परवाह नहीं करते, वे हरदम देश के लिए समर्पित रहते हैं और जरूरत पड़ने पर सर्वोच्च बलिदान देने को तैयार रहते हैं।विंग कमांडर नमांश स्याल की वीरता और समर्पण को हमेशा याद रखा जाएगा। उनके परिवार, कांगड़ा के लोग और समूचा देश इसी दहेज की रक्षा के लिए उनकी अमर स्मृति को श्रद्धांजलि देता है। उनका बलिदान न केवल आंसुओं को बहाएगा बल्कि आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति की मिसाल देगा।शोकमग्न भारत कहता है – नमांश को नमन, उनकी शहादत को सलाम।
“उनके बलिदान को कभी भुलाया नहीं जाएगा। कांगड़ा और भारत उन्हें सदैव याद रखेंगे।”यह वीर जवान हिमाचल की शान और देश की अमर गाथा हैं, जिन्होंने दुबई के आसमान में अपनी अंतिम उड़ान भरी और वीरगति को प्राप्त होकर अमरत्व पा लिया। हर भारतीय उनके इस साहस और समर्पण पर गर्व करता है।









